कोरोना: प्रक्रियाओं में अटक जा रही विदेशों से भेजी गई भारतीय प्रवासियों की मदद – Covid aid sent by Indian diaspora gets stuck in the process

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स्टोरी हाइलाइट्स

  • विदेशों से भारतीय प्रवासी भेज रहे मदद
  • IGST और क्लियरेंस प्रक्रिया के चलते हो रही दिक्कत

भारत कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से बूरी तरह जूझ रहा है. कोरोना संकट के बीच चिकित्सा उपकरणों की भारी कमी के चलते भी देश को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. देश विदेश से कई मदद के हाथ आगे आ रहे हैं. भारतीय प्रवासी विदेशों से चिकित्सा उपकरण भेज रहें हैं लेकिन उन्हें ऐसा करने में मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है. भारतीय प्रवासी के प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्हें देश में गैर सरकारी संगठनों, अस्पतालों को चिकित्सा सहायता भेजनी मुश्किल हो रही है.

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उनका कहना है कि क्लियरेंस प्रॉसेस और इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स रेट (IGST) के चलते मदद भेजने में मुश्किल हो रही है. ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की कई खेप IGST नियमों के कारण हवाई अड्डों पर पड़ी हैं. एम्स्टर्डम, नीदरलैंड में भारतीय प्रवासी का प्रतिनिधित्व करने वाले एक समूह ने भारत को चिकित्सा सहायता भेजने के लिए एक अभियान शुरू किया है.

कैप्टन संजय शर्मा द्वारा शुरू की गई ‘सपोर्ट ह्यूमैनिटी इन इंडिया’ ने 50 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर एकत्रित कर भारत भेजा है. इस ग्रुप का  लक्ष्य 1,000 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भारत भेजने का है. उनका कहना है कि लॉजिटस्टिक प्रबंधन में उनको काफी मुश्किल आ रही है.

शुरू में भारत सरकार कोरोना राहत के लिए निजी संस्थाओं द्वारा गैर-सरकारी संगठनों और अन्य संगठनों को आयात की जा रही मदद पर आईजीएसटी में छूट देने के लिए तैयार नहीं थी. यह छूट केवल भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी के माध्यम से भारत सरकार को दिए गए योगदान के लिए ही लागू थी. इस निर्णय को संशोधित किया गया और कोविड को राहत देने के लिए सभी आयातों को IGST से छूट दी गई. हालांकि छूट कुछ शर्तों के साथ जारी की गई है.

कैप्टन संजय शर्मा का कहना है, “भारतीय दूतावास ने हमें बताया कि अगर हम रेड क्रॉस के माध्यम से दान करते हैं तो हमें नीदरलैंड से भारत को 12 प्रतिशत IGST और प्लेन का किराया नहीं देना होगा. मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखा था जिसमें मांग की गई थी कि नीदरलैंड से ऑक्सीजन कंसंट्रेटर फ्री में भारत पहुंचाने और उसपर 12 फीसदी आईजीएसटी ना लगाई जाए. लेकिन हमें कोई जवाब नहीं मिला.”

 





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